* दिल में है *
सुखी इंसान वो जग में जहानत जिनके दिल में है
बुराई बीच रहकर भी शराफत जिनके दिल में है...
बताओ तो भला कैसे निभेगी दोस्ती उनमें
नदी के दो किनारों सी मफासत जिनके दिल में हैं...
सभी से भूल हो जाती सुनो इंसान हैं आखिर
उन्हें रब माफ़ करता है नदामत जिनके दिल में है...
नहीं नफरत से कुछ मिलता ये नफरत ही बढ़ाती बस
जरा लें सोच फिर से वो बगावत जिनके दिल में है...!
– मस्तानी


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