*अधूरी मोहब्बत*
अधूरी मोहब्बत की दास्तां अब क्या सुनाऊं
दर्द-ऐ-दिल के जख्म किस किस को दिखाऊं...
वहशी -ऐ-दिल की हर ख्वाहिश तोड़ गया ज़माना
टूटे हुए इस दिल के टुकड़े किस किस को दिखाऊं...
खड़ी हूँ आज भी मझधार में किसी के दर्द-ओ-गम सम्भाले
मिल ना सकेंगे हम कभी ये बात अब किस किस को बताऊं...
मेरी एक नज़र को आज भी तेरा इंतज़ार है हमदम
जला दिए जो खत तूने वो राख अरमानों की किस किस को दिखाऊ !!
– मस्तानी


दिल को छू गई
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