*-* माँ का एहसास *-*
जब मैं तेरी कोख में थी माँ
बड़ा खास था वो एहसास...
हर पल रहते थे हम हमेशा साथ
गुप् चुप से हम करते एक दूजे से बात...
जन्म लेकर मैं इस दुनियां में आयी
तेरे आँचल तले मैंने प्यारी निंदिया पायी...
जब हुई मैं स्यानी देखा माँ ने नौजवान
ब्याहकर मुझे भेज दिया घर अनजान...
माँ मैं तो तेरी ही परछाईं हूँ
फिर क्यों मैं उतनी ही परायी हूँ...
तेरे मेरे रिश्ते का वो एहसास
हमेशा रहेगा मेरे दिल के पास... !!
– मस्तानी @Kudi_Mastaani


बहुत सुंदर रचना है आपकी
ReplyDeleteऐसे ही लिखते रहिये ।।।
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏
Deleteआपका स्वागत है।
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