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Thursday, June 14, 2018

माँ का एहसास ( मेरा पहला ब्लॉग माँ को समर्पित)



*-* माँ का एहसास *-*

जब मैं तेरी कोख में थी माँ
बड़ा खास था वो एहसास...

हर पल रहते थे हम हमेशा साथ
गुप् चुप से हम करते एक दूजे से बात...

जन्म लेकर मैं इस दुनियां में आयी
तेरे आँचल तले मैंने प्यारी निंदिया पायी...

जब हुई मैं स्यानी देखा माँ ने नौजवान
ब्याहकर मुझे भेज दिया घर अनजान...

माँ मैं तो तेरी ही परछाईं हूँ
फिर क्यों मैं उतनी ही परायी हूँ...

तेरे मेरे रिश्ते का वो एहसास
हमेशा रहेगा मेरे दिल के पास... !!

– मस्तानी @Kudi_Mastaani

5 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना है आपकी

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  2. ऐसे ही लिखते रहिये ।।।

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